Space: A new world, the new future

A new book on Space (अंतरिक्ष) authored by K Siddhartha in Hindi to be released shortly.

शब्द, अर्थ, भाव तथा उनके अनुरूप जीवन सिद्धार्थ सर को चरितार्थ करता है। ज्ञान के क्षीर, प्रतिभा के सागर, ही के. सिद्धार्थ सर हैं। जब मैं सर्वप्रथम सर से मिली तो उनके विलक्षण व्यक्तित्व के तेज से बहुत प्रभावित हुई। उनके चारों तरफ सजी पुस्तकें, उनके ज्ञान के प्रति प्रेम को दर्शा रही थीं। उनके व्यक्तित्व को देख कर मन में माँ का सिखाया ख्याल आया “नर करनी करे, तो नर से नारायण हो जाए।“अपनी करनी से ही के. सिद्धार्थ सर आज नए आयाम हासिल कर पाए हैं।


अंतरिक्ष

इस पुस्तक के माध्यम से वह चाहते हैं कि हम अंतरिक्ष को जानें, अंतरिक्ष में भारत के योगदान को जानें। वह योगदान जो अब तक विश्व भर में नहीं माना गया है उसे न सिर्फ जानें, सराहें बल्कि उन कारणों को समझें, जिनकी वजह से यह योगदान भारत में ही सीमित होकर रह गया है। वह चाहते हैं कि हम, अंतरिक्ष यात्रा की टेक्नोलॉजी को समझें, अंतरिक्ष हमारे जीवन को कैसे आसान और सुखमयी बनाता है, उसे समझें। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति रुचि जागरूक करें। उनका मानना है कि, अंतरिक्ष न ही केवल एक नई दुनिया, बल्कि एक नई अर्थव्यवस्था तथा एक नया हथियार बन के हमारे सामने खड़ा हो सकता है। यह हथियार ही हमारी और हमारे देश की सुरक्षा की रीढ़ बनेगा। इसलिए बहुत जरूरी है अंतरिक्ष और उससे संबंधित मुद्दों को समझना। अंत में, पुस्तक के माध्यम से, वह अंतरिक्ष का एक नवीन सामरिक महत्व हमारे सामने लेकर आते हैं।

space

अंतरिक्ष किस प्रकार हमारी सारी समस्याओं का समाधान कर रहा है इस बात का हमें अंदाजा भी नहीं है। आजकल मोबाइल और इंटरनेट इतने सामान्य हो गए हैं, कि इनके पीछे छुपी अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी को हम सराहना ही भूल गए हैं। भारत के चंद्रयान मिशन अंतरिक्ष के प्रति थोड़ी रूचि और जागरूकता जरूर पैदा हुई थी, पर इससे जो अर्थव्यवस्था और राजनीतिकरण को नए आयाम मिले हैं उसे समझना भी बेहद जरूरी है। इन्हीं सब संगीन मुद्दों को इस पुस्तक में, हमारे सामने एक रोचक व सरल अंदाज में लाया गया है। अंतरिक्ष जैसे गूढ़ विषय को सरलता से प्रस्तुत करना कोई आम बात नहीं है। शायद इसीलिए आज तक अंतरिक्ष पर लिखी किसी रोचक पुस्तक का नाम ज़हन में आसानी से नहीं आता, और वह भी हमारी सुंदर हिंदी भाषा में। यह सिद्धार्थ सर के सरल एवं सुलझे हुए व्यक्तित्व की ही प्रतिभा है जो यह मुमकिन हो पाया है। खास बात यह है कि यह पुस्तक वैज्ञानिकों के लिए नहीं बल्कि आम पाठकों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों के लिए लिखी गई है। इस किताब के माध्यम से, आपके, और मेरे जैसे, आम पाठकों के लिए, अंतरिक्ष की काफी सारी उलझनें सुलझा दी गई हैं।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था “बच्चों साहसी बनो, उच्चतम सत्यों का प्रचार करो, उन्हें दुनिया में बिखेर दो।“ यह पुस्तक अंतरिक्ष के ऐसे कई सत्यों का प्रचार व प्रसार करती है। अब इन इन तथ्यों को पढ़ना, समझना और विश्व में बिखेरना आपका और हमारा काम है।

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